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बुजुर्गों में डिप्रेशन, हो सकता है विटामिन डी की कमी, जानिए क्या कहता है शोध

ईमोन लैर्ड ने एक शोध के जरिये ये बताया की , विटामिन-डी का संबंध हड्डी के अलावा स्वास्थ्य संबंधी अन्य दशाओं से भी है। और सबसे हैरानी की बात तो यह है कि इसकी कमी का असर अवसाद पर भी होता है.”

विटामिन-डी की कमी होने की वजह से बुजुर्गो में अवसाद का खतरा बढ़ जाता है। यह बात हाल ही में किये गए एक शोध से पता चली है । ये बात आपको मालूम ही होगा की विटामिन-डी का मुख्य स्रोत सूर्य की किरणें हैं। ऐसे में बुजुर्गो को सूर्य के प्रकाश से दूर रखने से उनको अवसाद का खतरा बढ़ सकता है। शोध में पाया गया कि विटामिन-डी की कमी से अवसाद का खतरा 75 फीसदी बढ़ जाता है.

 

हड्डी के अलावा इन जगहों से भी है कनेक्शन –

आयरलैंड के डबलिन विश्वविद्यालय के शोधार्थी ईमोन लैर्ड ने शोध में यह भी पाया कि विटामिन-डी का संबंध हड्डी के अलावा स्वास्थ्य संबंधी अन्य दशाओं से भी है। विटामिन डी की कमी से हड्डी के अलावा और भी सवस्थ से संबंधी समस्याएं होती है ।

 

4000 लोगों पर किया गया शोध –

उन्होंने परामर्श के अनुसार यह बताया की , विटामिन-डी का सेवन सुरक्षित है, और अपेक्षाकृत सस्ता भी है । पोस्ट एक्यूट एंड लांग टर्म केयर मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित इस शोध में 50 से अधिक उम्र के 4,000 लोगों को शामिल किया गया था.

 

विटामिन डी क्या है –

विटामिन डी किसी भी मनुष्य के शरीर में पाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण तत्व है। विटामिन डी का मुख्य काम शरीर में कैल्शियम बनाना है। अगर आपके शरीर में विटामिन डी की कमी होती है, तो इससे कैल्शियम की मात्रा भी कम हो जाएगी| यह शरीर में पाये जाने वाले सेवन हाइड्रक्सी कोलेस्ट्रॉल और अल्ट्रावायलेट किरणों की मदद से बनता है। डॉक्टरों का कहना है कि विटामिन डी की कमी से शरीर में हड्डियों समेत कई तरह की समस्या हो जाती है। अगर किसी बच्चे को 7 से 10 साल की उम्र में ही विटामिन की कमी है तो उसे वक्त रहते ठीक करा लेनी चाहिए, ताकि वह आने वाले वक्त में रोग प्रतिरोधक क्षमताओं की पूर्ति कर सके।

हमारे शरीर को नियमित रूप से विटामिन, कार्बोहाइड्रेट, मिनरल, फैट, प्रोटीन और पानी जैसे पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इसलिए हमें आहर में इन सभी पोषक तत्वों को शामिल करना चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को आहार के माध्यम से ये पोषक तत्व नहीं मिल पाते है, तो डॉक्टर उसे सप्‍लीमेंट लेने की सलाह देता है। हड्डियों, ब्रेन सेल्‍स आदि के विकास के लिए 6 मुख्य प्रकार के विटामिन ये है – विटामिन ए, विटामिन बी, विटामिन सी, विटामिन डी, विटामिन ई, विटामिन के और विटामिन डी की जरूरत होती हैं। ये सरे विटामिन्स हमारे स्वास्थ के लिए बहुत आवश्यक है।

 

आज हम आपको बताएंगे कि विटामिन डी सेहत के लिए कितना फायदेमंद है :

 

आंखों को नुकसान से बचाता है-

विटामिन डी की पर्याप्‍त मात्रा आपकी ऑप्टिक नर्वस को मजबूत बनाकर,आँखों को नुकसान पहुंचाने वाले जोखिम को रोकता है। यहां तक कि विटामिन डी आंखों को अनेक तरह की बीमारियों से रोकता है। यह हमारे आँखों के लिए बहुत जरुरी है।

 

गर्भाशय फाइब्रॉएड के जोखिम को कम करें –

गर्भाशय में होने वाले नॉन-कैंसरस ट्यूमर, जिसे गर्भाशय फाइब्रॉएड कहा जाता है। नियमित रूप से विटामिन डी के सेवन से इसे रोकने में मदद मिलती है, क्‍योंकि विटामिन डी असामान्‍य फाइब्रॉएड के विकास को रोकता है।

 

मसल्‍स की ऐंठन दूर करें –

विटामिन डी मसल्‍स टिश्‍यु को कैल्शियम बेहतर तरीके से अवशोषित करने में मदद करता है ,और यह मसल्‍स में होने वाली ऐंठन को काफी हद तक कम करने में भी मदद करता है।

 

वजन बढ़ने से रोकें –

विटामिन डी हमारे वजन को बढ़ने से भी रोकता है। साथ ही विटामिन डी फैट को अवशोषित कर आपके सेल्‍स की क्षमता को कम कर सकता है। इसके अलावा विटामिन डी हमारे शरीर के संतुलन को भी बेहतर बनता है।

 

फाइब्रोमायल्जिया के दर्द को कम करें –

विटामिन डी दर्द को कम करने में मदद करता है। फाइब्रोमायल्जिया जैसे समस्‍या के कारण मांसपेशियों में आने वाली सूजन के इलाज के लिए विटामिन डी बहुत मददगार होता है।

 

क्रोनिक सिरदर्द को रोकें –

विटामिन डी सिर में होने वाली सूजन को कम करके, सिरदर्द और साइनस के कारण होने वाले सिरदर्द को रोकने में मदद करता है।

 

ऐसे कई खाद्य पदार्थ हैं जिनमें विटामिन डी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं :

 

विटामिन डी से भरपूर आहार –

 

1. मछली

विभिन्न प्रकार की मछली जैसे ट्यूना और सालमोन विटामिन डी का काफी अच्छा स्रोत होता है। सालमोन मछली विटामिन डी की हमारी रोजाना की जरूरत का एक तिहाई हिस्सा पूरा कर देता है।

 

2. दूध

विटामिन डी का काफी अच्छा स्रोत है दूध। दिन भर में हमें जितने विटामिन की आवश्यकता होती है, उसका 20 फ़ीसदी हिस्सा दूध पीने से पूरा हो जाता है ,लेकिन अनफार्टफाइड डेयरी उत्पादों में आमतौर पर कम मात्रा में विटामिन डी पाया जाता है।

 

3. अंडे

स्वस्थ भोजन में अंडा निश्चित रूप से शामिल होता है। ये विटामिन डी से भरपूर होता है। वैसे अंडे की जर्दी में विटामिन डी की मात्रा ज्यादा होती है। अंडे के सफेद हिस्से में विटामिन डी की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होती।

 

4. संतरे का रस

संतरे के रस में भी विटामिन डी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। कई विशेषज्ञों की मानें तो अगर शरीर में विटामिन डी की मात्रा ठीक रहती है, तो स्वास्थ्य में सुधार जल्दी होता है। इसके लिए संतरे का जूस काफी अच्छा माना जाता है।

 

5. अनाज

विटामिन डी का समृद्ध स्रोत होता है अनाज। नाश्ते में विटामिन डी से भरपूर अनाज का सेवन कर आप अपने दिन की शुरुआत कर सकते हैं।

 

6. मशरूम

मशरूम में विटामिन डी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। लेकिन मशरूम के प्रकार भी इसके लिए काफी मायने रखता है। सफेद मशरूम की तुलना में शीटेक मशरूम में ज्यादा विटामिन होता है। तो विटामिन डी की पूर्ति के लिए आप अपने आहार में शीटेक मशरूम को शामिल करें।

 

7. ऑइस्टर (कस्तूरी)

ऑइस्टर एक स्वस्थ भोजन है।इसमें सिर्फ विटामिन डी के साथ-साथ विटामिन बी 12, कॉपर, जिंक और सेलेनियम भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। लेकिन इसमें कोलेस्ट्रोल की मात्रा ज्यादा होती है, इसलिए इसे खाने के लिए इसकी मात्रा का ध्यान रखना आवश्यक होता है।

 

8. पनीर

पनीर में अन्य खाद्य पदार्थ की तुलना में कम विटामिन डी पाए जाते है। रिकटता चीज में अन्य पनीर की तुलना में विटामिन डी की मात्रा ज्यादा होती है। इसलिए आप अपने आहार में पनीर को शामिल करें।

 

9. कॉड लिवर ऑयल

इसमें मौजूद विटामिन ए और डी के उच्च स्तर के कारण इसे सबसे अच्छा माना गया है। अगर आप विटामिन डी बढ़ाना चाहते हैं, तो अपने खाने में कॉड लिवर ऑयल का सेवन जरूर करे।

अगर आपके शरीर में विटामिन डी की मात्रा कम है, और इसे बढ़ाना चाहते हैं, तो अपने आहार में इन खाद पदार्थों को शामिल कर अपने स्वास्थ्य को स्वस्थ बना सकते हैं।

 

Conclusion :

 

यह बात हाल में किये गए एक शोध के जरिये बताया गया की बुजुर्गों में डिप्रेशन का कारण हो सकता है, जो की विटामिन डी की कमी के कारण होता है । हमारे शरीर को नियमित रूप से विटामिन जैसे पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इसलिए हमें नियमित आहर में इन सभी पोषक तत्वों को शामिल करना चाहिए। जिससे हमारा शरीर स्वस्थ रहे ।

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