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40 की उम्र में महिलाओं को जरूर कराने चाहिए ये 8 टेस्ट

40 की उम्र के बाद व्यक्ति के शरीर में रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है। इसलिए सभी के लिए समय समय पर स्वास्थ्य परिक्षण कराना जरुरी हो जाता है। तो आज हम बात करेंगे 40 की उम्र में महिलाओं को कौंसे टेस्ट कराने चाहिए। महिलाओं में 40 में गंभीर बीमारियां होने की सम्भावना भी बढ़ जाती है। जिसके लिए महिलाओं को अपने स्वास्थ्य की की भी देखभाल करनी चाहिए।

इसके लिए कुछ जरुरी मेडिकल टेस्ट करवाने चाहिए जो की संभावित बिमारियों को समय से पकड़ ले और उनका समय से इलाज किया जा सके। तो इसके लिए कुछ टेस्ट जो खास तौर पर 40 की उम्र से ज्यादा उम्र की महिलाओं के लिए जरुरी हैं।

 

तो आइये आगे पढ़ते हैं की वो कुछ टेस्ट्स जो की 40 की उम्र में महिलाओं को जरूर कराने चाहिए-

 

1. सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग:

 

ये पेप्स स्मीयर टेस्ट सर्वाइकल कैंसर की जांच के लिए करवाया जाता है। वैसे तो इस टेस्ट को महिलाओ को 30 साल की उम्र के बाद हर 5 साल में इसको करवाना चाहिए। लेकिन 40 की उम्र के बाद हर 5 साल में एक बार इसको करना जरुरी हो जाता है। 65 साल की उम्र तक इस कैंसर का खतरा बहुत ज्यादा होता है। इस टेस्ट से यूट्रस व उससे जुडी कोशिकाओं में होने वाले इन्फेक्शन और सूजन पता करने के लिए किया जाता है।

 

2. ब्रैस्ट कैंसर टेस्ट:

 

40 की उम्र में महिलाओं को ब्रैस्ट कैंसर का टेस्ट जरूर करवाना चाहिए वो भी हर 2 साल के अंतराल में। क्योकि 40 की बाद महिलाओं में ब्रैस्ट कैंसर का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। इसके लिए मोनोग्रफी कराई जाती है। इसकी जांच का खर्च करीब 2000 रूपये तक आ जाता है।

 

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3. साइकोलॉजिकल स्क्रीनिंग:

 

साइकोलॉजिकल स्क्रीनिंग सुनने में तो अजीब लग्र होगा लेकिन इसका भी समय समय पर टेस्ट करना जरुरी होता है क्योकि 40 की उम्र के बाद ज्यादा तर महिलायें तनाव में रहने लगती हैं। और डिप्रेशन का शिकार भी हो जाती हैं। और 40 के बाद मूड स्विंग्स होने की वजह से डिप्रेशन के साथ कई और बीमारियां भी होने की संभावना बढ़ जाती हैं। नींद न आना, चिड़चिड़ापन, जीने की इच्छा की कमी जैसे लक्षण अचानक से गंभीर हो कर सामने आते हैं। ये सब 75 प्रतिशत फीमेल्स में होता ही है क्योंकि हार्मोनल चेंजेस के कारण ऐसा होना पोसिबल है। डिप्रेशन को कम करने के लिए महिलाओं को साइकोलॉजिस्ट के पास जाकर स्क्रीनिंग टेस्ट करवाना होता हैं जिनमे साइकोलॉजी से जुड़े प्रश्नों के आधार पर डॉक्टर्स इसका इलाज करते हैं।

 

4. हड्डियों की जांच:

 

ऑस्टियोपोरोसिस बढ़ती उम्र के साथ होने वाली एक आम बीमारी हैं। इस बीमारी में जैसे-जैसे उम्र बढ़ती हैं वैसे-वैसे हड्डियां मुलायम होने लगती हैं और चटकने लगती हैं। इसका इलाज धीमा और थोड़ा मुश्किल होता हैं क्योकि जब तक किसी महिला को इस बीमारी के बारे में पता चलता हैं तब तक बहुत देर हो चुकी होती हैं। यह समस्या कैल्शियम की कमी के कारण होती ह जो भी संभव हैं क्योकि बढ़ती उमर के साथ हमारे शरीर में कई खाद्य पदार्थ ऐसे हैं जिकी खपत हमारा शरीर बहुत जल्दी करता हैं जिनमे से एक होता हैं “कैल्शियम” और जैसे-जैसे उम्र बढ़ती हैं वैसे-वैसे हड्डियों में कैल्शियम कीकमी होने लगती हैं। इसलिए महिलाओं को समय समय पर हड्डियों की जाँच करवानी चाहिए।

 

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5. थाइरॉइड :

 

थाइरॉइड एक ऐसी बीमारी हैं जिसकी कोई उम्र तय नहीं है की वो इस उम्र में होने लगती है या इस उम्र के बाद शुरू हो जाती है लेकिन 40 की उम्र के बाद इसकी जांच करना बहुत जरूरी हो जाता है। थाइरॉइड धीरे धीरे पूरी बॉडी के सिस्टम पर अटैक करता है और फिज़िकली ही नही मेंटली भी प्रॉब्लम क्रिएट करता है। लेकिन 35 के बाद अगर अचानक से वजन बढ़ने, कोलेस्ट्रोल, उदासी, तनाव जैसे लक्षण दिखने लगें तो महिलाओं को थायरॉइड जांच करानी चाहिए। इसके लिए ब्लड टेस्ट कराना पड़ता है।

 

6. पेल्विक अल्ट्रासाउंड:

 

पीरियड्स का अनियमित होना, थकान या बच्चेदानी में सूजन जैसी परेशानियां समय-समय पर महिलाओं को फेस करनी पड़ती हैं। इसलिए जरूरी है कि इन समस्याओं के लिए डॉक्टर की सलाह पर पेल्विक अल्ट्रासाउंड टेस्ट करवाया जाए। जिससे ओवरी कैंसर के खतरे से बचा जा सकता है।

 

7. ब्लड प्रेशर:

 

ब्लड प्रेशर तो पुरुषों को ही नहीं बल्कि महिलाओ को भी चेक करवाना चाहिए। ब्लड प्रेशर की वजह से महिलाओं को हाइपरटेंशन का, हाई ब्लड प्रेशर से स्ट्रोक, दिल की बीमारियां, किडनी ख़राब होने जैसी गंभीर समस्या हो सकती हैं। इसलिए अगर बीपी 120/80 से 139/89 के बीच है तो साल में एक बार जांच कराएं और अगर बीपी 140/90 से ज्यादा हो तो डॉक्टर से तुरंत इलाज कराने की जरूरत है क्योंकि इससे हाइपरटेंशन की समस्या हो सकती है।

 

8. कोलेस्ट्रॉल चेकअप:

 

हाई कोलेस्ट्रॉल होने के कारण हृदय रोग भी हो सकता हैं। इसलिए साल में बार कैलेस्ट्रोल की जांच भी करना भी जरूरी होता है। कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाने से आपको इसके संतुलन और असंतुलन का पता चल सकेगा। अगर आपका कोलेस्ट्रोल 130 से ज्यादा है, तो सावधान होजाए । पिटसबर्ग यूनिवर्सिटी में हुई स्टडी में भी ये पाया गया है कि कैलेस्ट्रोल टाइप-1 डाइबिटीज़ और हार्ट से जोड़े रोगों को बढ़ाता है।

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